जब तक मंजिल मिल ना जाती चैन नहीं आराम नहीं। जब तक मंजिल मिल ना जाती चैन नहीं आराम नहीं।
जो नजरों से गिर जाये उसे उठाना नहीं। जो नजरों से गिर जाये उसे उठाना नहीं।
कर रहे हैं वे शहर की इस तरह रखवाली कर रहे हैं वे शहर की इस तरह रखवाली
कल की किसने सोची है क्योंकि जो वर्तमान में जीता है कल की किसने सोची है क्योंकि जो वर्तमान में जीता है
गुज़र गया जो वक्त हाथ कहां आएगा, गुज़र गया जो वक्त हाथ कहां आएगा,
कर्तव्य निभाएं आने वाली पीढ़ी को इंसानियत का पाठ पढ़ाएं। कर्तव्य निभाएं आने वाली पीढ़ी को इंसानियत का पाठ पढ़ाएं।